चैतन्य कॉलेज में हुआ नवाचार, विचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विशेष परिचर्चा का आयोजन

चैतन्य कॉलेज में हुआ नवाचार, विचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विशेष परिचर्चा का आयोजन

 

पामगढ 07 अगस्त 2025,

चैतन्य विज्ञान एवं कला महाविद्यालय, पामगढ़ में दिनांक 06 अगस्त 2025 को संस्था के इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल के तत्वावधान में नवाचार, विचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम विषय पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में नवाचार की भावना का विकास करना, उन्हें रचनात्मक विचारों हेतु प्रेरित करना एवं स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संस्था फ़ारमर्स प्राइड के संचालक नवाचार एवं स्टार्टअप विशेषज्ञ संदीप शर्मा उपस्थित रहे।
श्री शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हर सफल स्टार्टअप एक सामान्य विचार से आरंभ होता है। इसके लिए कोई अद्भुत तकनीक या भारी संसाधन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि समस्याओं को नई दृष्टि से देखने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता ही नवाचार का मूल है। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया कि सामान्य छात्र भी यदि उत्साह, धैर्य एवं सतत प्रयास करें तो एक सफल उद्यमी बन सकते हैं। संस्था के प्राचार्य डॉ. वी. के. गुप्ता सभा में अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान युग नवाचार का युग है। हमारी शिक्षा प्रणाली को अब केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें छात्रों में विचारशीलता, रचनात्मकता तथा समाधान-केन्द्रित सोच को प्रोत्साहित करना होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि महाविद्यालय नवाचार संबंधी विचारों व परियोजनाओं में छात्रों को हरसंभव तकनीकी, आर्थिक एवं मार्गदर्शी सहयोग प्रदान करेगा। महाविद्यालय के संचालक वीरेंद्र तिवारी ने इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल की उपलब्धियों की सराहना करते हुए छात्रों को नवाचार हेतु प्रोत्साहित किया और शुभकामनाएँ दीं। आईक्यूएसी समन्वयक विवेक जोगलेकर ने कहा कि आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ केवल दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है जो नवाचार, गुणवत्ता एवं रचनात्मकता के माध्यम से शिक्षा की संपूर्ण प्रणाली को समृद्ध करती है। छात्रों को प्रयोग करने, गलतियाँ करने और उनसे सीखने की स्वतंत्रता देना ही सच्चा नवाचार है। वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. वीणापाणी दुबे ने कहा कि प्राकृतिक विज्ञानों में नवाचार की असीम संभावनाएँ निहित हैं। यदि छात्र स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करना सीख जाएँ, तो वे समाजोपयोगी विज्ञान को बढ़ावा दे सकते हैं और रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा भी प्रस्तुत नवाचार आधारित विचार प्रस्तुत किए गए । परिचर्चा के अंत में श्रीमती शुभदा जोगलेकर ने मंच से सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागी छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों एवं आयोजन से जुड़े समस्त सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से महाविद्यालय में नवाचार की सकारात्मक संस्कृति का विकास होता है। हम सभी सहभागियों के योगदान के लिए उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं और आशा करते हैं कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन और अधिक प्रभावशाली रूप में होते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन आईआईसी समन्वयक डॉ. नरेंद्र नाथ गुड़िया ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय छात्र छात्राएं समस्त प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!