
चैतन्य विज्ञान एवं कला महाविद्यालय में इंटेलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर हुआ कार्यशाला का आयोजन

चैतन्य विज्ञान एवं कला महाविद्यालय पामगढ़ के संस्थागत नवोन्मेष परिषद के एवं राजीव गाँधी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रबंधन संस्थान नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार 1 5 अप्रैल को इंटेलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पेटेंट एवं डिजाइन फाइलिंग पर एकदिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर राजीव गाँधी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा संस्थान नागपुर के पेटेंट एवं डिजाइन विभाग के सहायक नियंत्रक श्री कुमार राजू, विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्रालय के नवोन्मेष प्रकोष्ठ के अधिकारी अभिषेक रंजन कुमार, गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ (श्रीमती) गरिमा तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती की स्तुति से किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम के समन्वयक डॉ नरेंद्र गुरिया ने अतिथियों का परिचय प्रदान करते हुए स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्री कुमार राजू ने कहा कि बौद्धिक संपदा एक अमूर्त संपदा है। जो मानव मस्तिष्क की उपज है। उन्होंने बौद्धिक संपदा के अधिकारों की मूलभूत जानकारी देते हुए इसके जरूरत व इससे रक्षा के उपायों के बारे में बताया । उन्होंने बौद्धिक संपदा के अधिकारों के इतिहास के बारे में विस्तार से बताते हुए इसके अंतर्गत आने वाले विभिन्न शाखाओं के बारे में बताया । उन्होंने पेटेंट कॉपीराइट डिजाइन जीआई टैग ट्रेड सीक्रेट के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। विशिष्ट अतिथि अभिषेक रंजन कुमार ने बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित प्रासंगिक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बौद्धिक संपदा के अधिकारों की रक्षा को सभी के कल्याण के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने केवल धन अर्जन के लिए बौद्धिक संपदा के अधिकारों के उपयोग को अनुचित बताया और कहा कि भारत में आईपीआर के क्षेत्र अपार सम्भावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बौद्धिक संपदा के अधिकारों से संबंधी भ्रांतियों को भी दूर किया। विशिष्ट अतिथि डॉ(श्रीमती) गरिमा तिवारी ने बताया कि ज्ञान के प्रकार व ज्ञान की गुणवत्ता के आधार पर बौद्धिक संपदा के अधिकारों की चर्चा की जाती हैं। बौद्धिक संपदा अधिकारों का सामाजिक महत्त्व है। उन्होंने दोहा में हुए विश्व व्यापार संगठन के सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है। ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बौद्धिक संपदा के अधिकारों का संरक्षण आवश्यक हो जाता है। यही कारण है कि बहुत से औद्योगिक घराने बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में रूचि दिखा रहे हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति के लिए भी आईपीआर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह तकनीकी का वरदान ही है कि हम अपने रचनात्मक विचारों को मूर्त रूप में ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की कलात्मक नवीनता एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देने हेतु चैतन्य महाविद्यालय हमेशा तत्पर है। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ वी के गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अपने बौद्धिक संपदा के अधिकारों को सुरक्षित करके आय भी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों के विभिन्न जर्नलों का अध्ययन करने का आवाह्न किया। उन्होंने विदेशों में पंजीयन होने वाले पेटेंट का अध्ययन करके नवोन्मेषकों का प्रयास करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने पेटेंट और कॉपीराइट के विभिन्न शर्तों से सभा को अवगत कराते हुए आवेदन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। संस्थान के संचालक एवं चेयरमैन श्री वीरेन्द्र तिवारी बौद्धिक संपदा के अधिकार जैसे प्रासंगिक विषय पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए आयोजन समिति को बधाई दी और कहा कि भविष्य में इस प्रकार के आयोजन नियमित अंतराल पर होते रहने चाहिए इससे विद्यार्थीगण नवोन्मेष के लिए प्रेरित होंगे। वरिष्ठ प्राध्यापक एवं आईक्यूएसी समन्वयक श्री विवेक जोगलेकर ने कहा कि जनसंख्या के लिहाज से भारत में पेटेंट और कॉपीराइट के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या में कमी चिंताजनक है। इस कमी को दूर करने के लिये उन्होंने विद्यार्थियों के वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि उच्च प्रशिक्षित शिक्षक नवोन्मेष के वाहक बन सकते है। उन्होंने भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए नवोन्मेष को गति देने आप की जरूरत बताई। वरिष्ठ प्राध्यापक श्रीमती शुभदा जोगलेकर ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज का यह कार्यक्रम सभी विद्यार्थियों के लिए उत्पादक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि किए गए रचनात्मक कार्यों के प्रामाणिक दस्तावेजीकरण से ही इस कार्यक्रम की सार्थकता सिद्ध हो सकती है। विद्यार्थियों ने भी कार्यशाला में अपनी रुचि प्रदर्शित करते हुए वक्ताओं से जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। प्राणिशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापक भगवती साहू ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संचालन समिति के सदस्य वनस्पति शास्त्र विभाग की प्रमुख डॉ वीणापाणि दुबे, वाणिज्य विभाग के प्रमुख डॉ अशोक सिंह यादव रसायन शास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक ऋषभ देव पाण्डेय का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम कंप्यूटर साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक धनेश्वर सूर्यवंशी, सालिक राम एवं कंप्यूटर शास्त्र प्रयोगशाला के तकनीशियन सरोजमणि बंजारे ने तकनीकी सहायता प्रदान की। कार्यक्रम में महविद्यालयीन स्टाफ सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शोधार्थी विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।







