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पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी मोहन कौशिक के सेवा निवृत्ति पर विदाई

पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी मोहन कौशिक के सेवा निवृत्ति पर विदाई

 

 

शासकीय महामाया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पामगढ़ में में कार्यरत व्याख्याता एवं पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी मोहन कौशिक के शिक्षकीय सेवा के अर्ध वार्षिकी सेवा पूर्ण कर सेवा निवृत्ति होने पर महामाया परिवार की ओर से विदाई दी गई, इस अवसर पर संस्था के प्राचार्य आर के बंजारे, विकास खंड शिक्षा अधिकारी रामेंन्द जोशी, सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वय जे आर सारथी, राकेश सोनी, क्रीड़ा अधिकारी सोनंत , सुरेश सिंह क्षत्रिय, दिलीप थवाईत, मन्नू लाल कर्ष, श्रवण दास वैष्णव, पी एल कौशिक प्राचार्य, निर्मला कौशिक, सुरेन्द्र खरे लक्ष्मी मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप उपस्थित थे । मुख्य आतिथ्य के आसंदी में मोहन कौशिक थे। कार्य क्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के पूजा अर्चना के साथ हुआ सरस्वती बंदना वैष्णव जी, मनोरमा साहू, सोनम तिवारी, द्वारा प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात अतिथियों के स्वागत पुष्प माला , बूके , एवं स्वागत गीत के साथ किया गया। उद्बोधन के क्रम में विकास खंड शिक्षा अधिकारी जोशी जी ने पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी मोहन कौशिक के सफलता पूर्वक दायित्व निर्वहन पर सराहना किए, सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी सारथी के द्वारा विकास खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए शिक्षको सर्विस बुक संधारण से लेकर उक्तियुक्तकरण जैसे पेचीदा कार्य को पूरे जिले में बिना कोई खामी के , जिला प्रशासन द्वारा दिये कार्य, शिक्षकों की सारी समस्या,ईमानदारी पूर्वक समस्त कार्य निष्पादित करने की प्रशंसा किए, सुरेश सिंह, पी एल कौशिक, एम एल कर्ष, श्रवण दास वैष्णव,सोनम तिवारी प्रांतिका गोस्वामी व राकेश सोनी द्वारा कौशिक के शिक्षकीय कर्तव्य एवं विकास खंड अधिकारी के पद का निर्वाद रुप से ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करने की प्रशंसा किए। संस्था के प्राचार्य ने कौशिक के पारिवारिक पृष्ठभूमि से लेकर पूरे शिक्षकीय जीवन पर प्रकाश डाला पामगढ़ विकास खंड के एक बड़े ग्राम डोंगाकोहरौद के प्रतिष्ठित कुर्मी किसान परिवार स्वर्गीय केशव प्रसाद व स्वर्गीय पुराना बाई के जेष्ठ पुत्र के रूप में 02 मई 1964 में पैदा हुए । इनके दादा झाड़ू राम के देख रेख एवं संस्कार से शुरू से मेघावी छात्र रहे बीएससी के पढाई के दौरान ही इनकी नियुक्ति सहायक शिक्षक के रूप में 19 जनवरी 1985 को शासकीय प्राथमिक विद्यालय बासीन सक्ती हुई। लगभग 3 साल 6 माह सेवा के बाद इनका स्थानांतरण शासकीय महामाया महामाया उ मा वि पामगढ़ में हुई यहाँ गणित विषय के अध्यापन कार्य दक्षता पूर्वक किये पूरे पामगढ़ क्षेत्र में गणित विषय के ख्याति प्राप्त शिक्षक के रुप में जाने जाते हैं बाद में इनकी पदोन्नति अंग्रेजी विषय के व्याख्याता के पद पर हूई इन्होंने शिक्षा विभाग में 41 बर्ष और 6 माह तक सेवा दिये , व्याख्याता के पद पर रहते इन्हें विकास खंड शिक्षा अधिकारी पामगढ़ का वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारी शिक्षा विभाग द्वारा दिया जिसे बखूबी से कुशलता पूर्वक संचालित कर शिक्षकों के सर्विस बुक से लेकर सारे समस्याओं का समाधान करते हुए शिक्षकों के चहेते विकास खंड शिक्षा अधिकारी साबित हुए। इनका पढाई के साथ बच्चो के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य को पूरा करने हेतु खेल कूद, स्काउट गाइड, राष्ट्रीय सेवा योजना, रेड क्रॉस एवं सास्कृतिक कार्यक्रमों विशेष प्रयास रहा, इनके नेतृत्व में संस्था के 35 बच्चों को राज्यपाल पुरुष्कार, खेल कूद में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक विद्यार्थी को प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला स्वयं राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर तक कोच एवं मैनेजर के रूप में चयनित हुए थे। स्काउट गाइड के वर्ल्ड रिकॉर्ड कर्मा नृत्य में इनका अहम् योगदान रहा, इन सारे क्रियाकलाप ,पढाई , कर्तव्य निष्ठ, ईमानदारी आदि गुणों आंकलन करते हुए इन्हें महामहिम राज्यपाल द्वारा सन् 2012 मे उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में राज्यपाल पुरुष्कार से नवाजा गया जो कि पामगढ़ विकास खंड और महामाया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के इतिहास में पहली बार यह सम्मान प्राप्त हुआ। स्काउट गाइड में विशेष योगदान के लिए राजभवन में बेस्ट स्काउर एवं स्काउट गाइड में लम्बे समय तक योगदान देने के लिए राज्यपाल द्वारा दीर्घ कालिन सेवा पदक प्रदान किया गया, कुर्मी समाज द्वारा राज्य स्तर सर्वोच्च सम्मान कुर्मि शिखर सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया है। अंत में मोहन कौशिक ने अपने शिक्षकीय जीवन की यादें साझा किए उन्होंने अपने बच्चों के प्रति समर्पण को अन्य शिक्षकों को प्रेरित किए कि यदि हम विद्यार्थियों को ईमानदारी पूर्वक पढाये उनके सर्वांगीण विकास के बारे सोचे तो अवश्य ही बच्चे शिक्षकों का सम्मान करेंगे बच्चों के साथ साथ समाज भी सम्मान करता है। कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से श्रीफल ,वस्त्र ,अभिनंदन पत्र , स्मृति चिन्ह् भेट कर विदा किए कौशिक के विदाई रथ में बिठाकर बैंड बाजे के साथ उनके घर तक जाकर किए मंच का संचालन संस्था के व्याख्याता बसावन लहरे द्वारा किया गया इस अवसर पर कौशिक के पूरे परिवार निर्मला कौशिक, पी एल कौशिक, ईश्वर कौशिक, आशा, सरस्वती ,कावेरी , सरिता, राजकुमार,रामगोपाल, लखेश्वर, रामकिर्तन, गायत्री, मनीषा, योगेश ,अमित, आशिष, हरिश, योगिता, अल्का मंजुलता के साथ साथ संस्था के शिक्षक आर आर बर्मन, आर एल डड़सेना,मनोरमा साहू,जयकिशन साहू,सुरेश आनंद ,अजय महिपाल, रामलाल कश्यप, गीता सोनी, प्रांतिका गोस्वामी, विनय साहू, मनोज राज, गौरी, यशोदा, चंद्रशेखर यादव, खुशांत मंजुलता, गामिनी,स्वर्णिमा, हर्षा अंकिता लीना ,गुलाब दिवाकर केशव साहू सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित थे।

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